स्थायी मंदिर बनने तक रामलला के लिए बनेगा स्वर्ण मंदिर: अविमुक्तेश्वरानंद
December 1, 2019 • बाराबंकी टाइम्स

 अयोध्या : रामजन्मभूमि रामालय न्यास के अध्यक्ष जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य एवं रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जन्मेजयशरण के आश्रम जानकीघाट बड़ास्थान में मीडिया से भेंट की।

उन्होंने कहा कि सुप्रीमकोर्ट का जो आदेश है, उसकी मूल भावना ऐसी नहीं है कि मंदिर निर्माण के लिए शासकीय न्यास का गठन हो। इसी के साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए रामालय ट्रस्ट के अधिकार की वकालत की। कहा, अयोध्या एक्ट के आधार पर रामालय ट्रस्ट मंदिर निर्माण के लिए विधिक रूप से सक्षम संस्था है। हमारा दावा सही है और हमने मंदिर निर्माण के लिए सरकार को पत्र भी भेजा है। रामालय न्यास के सचिव ने बताया कि 1993 के अधिग्रहण कानून के अनुसार रामजन्मभूमि के साथ अधिग्रहीत भूमि किसी ऐसे ट्रस्ट को नहीं दी जा सकती, जिसका गठन इससे पूर्व हुआ हो। ऐसे में रामालय ट्रस्ट ही एकमात्र ऐसी संस्था है, जो रामलला के मंदिर निर्माण की हकदार है। उन्होंने महंत जन्मेजयशरण की अध्यक्षता में 2008 में गठित रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास का जिक्र करते हुए कहा, यह संस्था हमारे साथ है और इसके लोग रामालय ट्रस्ट के साथ मंदिर का निर्माण करेंगे। रामालय न्यास के सचिव ने कहा, रामलला तिरपाल में बैठे हैं। सबके मन को यह बात कचोटती थी। सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद अब मंदिर बनना है लेकिन मंदिर बनने का जो मार्ग है, वह अभी प्रशस्त होना शेष है। मंदिर बनना शुरू होगा तो लंबा समय लगेगा, लंबे समय तक क्या भगवान तिरपाल में ही बैठे रहेंगे। ये पीड़ा प्रत्येक रामभक्त के मन में है। रामजन्म भूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास भी यह पीड़ा व्यक्त कर चुके हैं। ऐसे में रामालय न्यास की योजना है कि जब तक भव्य मंदिर का निर्माण हो, तब तक रामलला को तिरपाल के ढांचे से निकाल कर स्वर्ण मंदिर में स्थापित किया जाय। भव्य मंदिर बन जाने पर रामलला को सुविधानुसार इस स्वर्ण मंदिर के साथ अथवा इससे निकाल कर भव्य मंदिर में स्थापित किया जाय। उन्होंने कहा कि जब तक विवाद था, तब तक हमारी मजबूरी थी। अदालत से यथास्थिति का आदेश था। अब कोई मजबूरी नहीं है, विजय हो चुकी है। अब जल्द से जल्द उनकी गरिमा एवं महिमा के अनुरूप मंदिर तैयार हो जाए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि चेन्नई में एक बड़े काष्ठ कलाकार से संपर्क किया गया है। वह सात पीढ़ियों से मंदिर बनाते हैं। स्वर्ण मंदिर के लिए एक नक्शा भी उन्होंने बना कर दिया है। यह फोर डायमेंशनल मॉडल है। रामालय ट्रस्ट का प्रयास है कि जैसे ही भगवान सूर्य उत्तरायण होंगे अर्थात मकर संक्राति के बाद कभी भी रामलला को स्वर्ण मंदिर में स्थापित किया जाय। उन्होंने स्वर्ण मंदिर का मॉडल प्रदर्शित करने के लिए सात दिसंबर को पुन: अयोध्या आने का वायदा भी किया। अविमुक्तेश्वरानंद ने रामलला के प्रस्तावित मंदिर के बारे में कहा, ऐसा मंदिर बनना चाहिए जैसा पहले कभी नहीं बना और कोशिश होनी चाहिए कि भविष्य में भी इस टक्कर का मंदिर न बन सके।

इसका शिखर 1008 फीट ऊंचा होना चाहिए। भोजनालय ऐसा हो, जिसमें कम से कम एक लाख आठ हजार लोग एक साथ भोजन कर सकें। इस मौके पर महंत जन्मेजयशरण सहित रामजन्मभूमि के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास, नागा रामलखनदास आदि भी मौजूद रहे।

अयोध्या के जानकीघाट बड़ास्थान पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ महंत जन्मेजयशरण, रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास, नागा रामलखनदास ' जागरण

भाव तो है पर भव्यता नहीं

अविमुक्तेश्वरानंद ने रामजन्मभूमि न्यास की ओर से प्रस्तावित मंदिर और तराशी जा रहीं शिलाओं के बारे में कहा, इसमें करोड़ों रामभक्तों का भाव तो है पर रामलला के वैशिष्ट्य के अनुरूप बनने वाले मंदिर की भव्यता नहीं है। इसके प्रति पूरा आदर है पर यह मंदिर रामजन्मभूमि पर बनने वाले मंदिर की कल्पना और आकांक्षा के आगे कहीं नहीं ठहरता।