नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी, सोमवार को संसद में होगा पेश
December 5, 2019 • बाराबंकी टाइम्स

पाक, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता

 नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक की ओर अहम कदम बढ़ा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इस महत्वाकांक्षी विधेयक को मंजूरी दे दी। सोमवार को इसे लोकसभा में पेश किया जा सकता है। विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए माना जा रहा है कि संसद में इस पर व्यापक बहस हो सकती है। गणित की बात करें, तो लोकसभा में इसे पारित कराना सरकार के लिए मुश्किल नहीं होगा। राज्यसभा में भी कुछ गैर राजग दलों की ओर से समर्थन की उम्मीद है।

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर छिड़ी बहस के बीच ही मोदी सरकार की ओर से साफ कर दिया गया था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताड़ना के कारण भारत आए हंिदूू, बौद्ध, सिख, जैन व अन्य धर्मावलंबियों को भारत में नागरिकता दी जाएगी। मुस्लिम को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा क्योंकि इन तीनों देशों में मुस्लिम ही बहुमत में हैं। इस संबंध में सरकार ने पिछले साल भी लोकसभा से विधेयक पारित करा लिया था लेकिन राज्यसभा में विपक्ष ने इसे रोक दिया। हालांकि भाजपा सूत्रों का मानना है कि इस बार राज्यसभा में भी कोई अड़चन नहीं आएगी। दोनों सदनों में भाजपा के रणनीतिकार अभी से चुस्त हैं। कई राजनीतिक दल इस विधेयक के विरोध में हैं। हालांकि मुखर विरोध कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की ओर से ही किया गया है।

पूरे देश के हित में है विधेयक: बुधवार को कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि विधेयक पूरे देश के हित में है। इसका हर वर्ग स्वागत करेगा। अनुच्छेद-370 हटाने के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के दिल के करीब है। एक दिन पहले ही भाजपा संसदीय दल की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने का स्पष्ट निर्देश दिया है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान में यह विधेयक भाजपा के वादों में शुमार रहा है।

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..जब पीयूष गोयल ने लगाई दौड़: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को संसद के प्रश्नकाल में वक्त पर पहुंचने के लिए दौड़ लगानी पड़ी। गोयल बुधवार को पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में शामिल हुए। इस बीच प्रश्नकाल का वक्त हो गया। वह कार से उतरे और दौड़ते हुए संसद में पहुंचे। भाजपा नेता सुरेश नाखुआ ने यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। इसके बाद मंत्री की दौड़ लगाते हुए तस्वीरें वायरल हो गईं ' एएनआइ

सुप्रीम कोर्ट जा सकती है कांग्रेस

कांग्रेस ने जरूरत पड़ने पर विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। कांग्रेस नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने विधेयक को असंवैधानिक एवं विभाजनकारी बताते हुए कहा है कि पार्टी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, 'जिन्हें लगता था कि धर्म राष्ट्रीयता का आधार होना चाहिए, उन्होंने पाकिस्तान बना लिया था। हम महात्मा गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और डॉ. आंबेडकर का विचार मानते हैं कि धर्म से राष्ट्रीयता धर्म से निर्धारित नहीं हो सकती।'

आपत्तियां दूर करने में जुटे हैं शाह

 

इस विधेयक को अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम व नगालैंड समेत पूवरेत्तर के अन्य राज्यों से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने पूवरेत्तर के विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र इकाइयों और सामाजिक संगठनों से मुलाकात कर उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि पूवरेत्तर के उन राज्यों को कुछ छूट मिलेगी जो छठी अनुसूची में आते हैं या जहां विशेष प्रावधान लागू है।

लोकसभा में नहीं होगी दिक्कत, राज्यसभा में समर्थन की उम्मीद

समर्थन जुटाने को दोनों सदनों में भाजपा के रणनीतिकार चुस्त

घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई के लिए राज्यों को कहा

नई दिल्ली, प्रेट्र: केंद्र घुसपैठियों पर नकेल कस रहा है। इसके लिए राज्यों को पुलिस व खुफिया एजेंसियों को सक्रिय करने के लिए कहा गया है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि घुसपैठिये देश में यात्री, पर्यटक व कारोबारी आदि के तौर पर आते हैं और वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद वापस नहीं जाते।

शिवसेना समेत कई दलों का रुख अहम

हाल ही में राजग से नाता तोड़कर महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन सरकार बनाने वाली शिवसेना का रुख भी विधेयक पर देखने लायक होगा। अब तक तो शिवसेना इसके पक्ष में रही है, लेकिन अब भाजपा विरोधी रुख के कारण उनका फैसला अहम होगा। बताया जा रहा है कि वह सदन से बाहर रहने का भी फैसला कर सकती है। दूसरी ओर बीजद, टीआरएस, वाईएसआरसीपी जैसे दल अनुच्छेद 370 समेत कई मुद्दों पर सरकारी विधेयकों को राहत देते रहे हैं। इस बार भी सरकार को इनसे समर्थन की उम्मीद है। तृणमूल ने इसे सांप्रदायिक विधेयक करार दिया है।