मेले दे रहे ‘जो रब है वही राम है’ का संदेश
November 8, 2019 • बाराबंकी टाइम्स

बाराबंकी

देश में जहां अयोध्या पर प्रस्तावित फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है वहीं रामनगरी के सीमावर्ती जिले में सौहार्द की छटा बिखर रही है। दोनों समुदायों की ओर से फैसले का सम्मान करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसकी वजह यहां की परंपराएं, धर्मस्थल और लगने वाले विभिन्न पंथों के छोटे-बड़े करीब ढाई सौ से अधिक मेले हैं। यहां के महाभारतकालीन लोधेश्वर, कुंतेश्वर, पारिजात वृक्ष, सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की देवा स्थित दरगाह, सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक बाबा जगजीवन साहेब की तपोस्थली कोटवाधाम व एकनामी संप्रदाय के तपोस्थली हेतमापुर आपसी सौहार्द की मिसाल बने हुए हैं। इन स्थानों के अलावा जिलेभर आयोजित होने वाले मेलों में 'जो रब है वही राम का संदेश' गूंजता रहता है।

जिले में देवा, महादेवा, कोटवाधाम, बांसा शरीफ, नागदेवता मंदिर, धन्नाग, रामपुर जैसे प्रसिद्ध मेला में सुदूर क्षेत्रों से व्यापारी ही नहीं आते बल्कि मेलार्थी भी काफी संख्या में आते हैं। इन मेलों के मंच से हंिदूू-मुस्लिम एकता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया जाता है। देवा में कार्तिक मास में 'जो रब है, वहीं राम' सूफी संत हाजी वारिस शाह के पिता हाजी कुर्बान अली की याद में मेला लगता है। महादेवा मेला के मंच से भी एकता का संदेश प्रचारित होता है। इसी कड़ी में ईद के दिन से शुरू होने वाले मसौली के बांसा शरीफ, कोटवाधाम में बाबा जगजीवन दास साहेब की तपोस्थली पर साल में चार बार लगने वाले, हेतमापुर के कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिप्रदा से लगने वाले तीन दिवसीय मेला के अलावा रामपुर, सतरिख के मजीठा स्थित नागदेवता मंदिर, सीतापुर और बाराबंकी की सीमा पर लगने वाले धन्नाग मेला भी शामिल हैं।

देवा स्थित प्राचीन हाजी वारिस अली शाह की मजार ' जागरण यहां लगते हैं सौहार्द के मेले

देवा क्षेत्र के नकरसेन मंदिर पर हर पूर्णमासी को मेला, बबुरी गांव में बाबा खुशहाल दास का जन्माष्टमी के बाद, बदोसराय के मैला रायगंज, रामसनेहीघाट के सुमेरगंज, बुढ़वा बाबा मंदिर, शहीद मर्द बाबा मजार, सूरतगंज के हेतमापुर, सुढ़ियामऊ के हजरत बूढ़न शाह शहीद की मजार सहित जिलेभर में ढाई सौ मेले लगते हैं।

सूफी संतों ने दिया कौमी एकता का संदेश

 

संवादसूत्र, सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी) : मेलों के आयोजन से आपसी भाईचारा मजबूत होता है आपसी भाईचारे की मिसाल को कायम करने के लिए ही सूफी संतों ने जन्म लेकर संपूर्ण मानव जाति को कौमी एकता का संदेश दिया है। यह बातें कस्बा बदोसराय हजरत मौलाना शाह रहमतुल्ला अलैह (मलामत शाह) की दरगाह के सालाना उर्स व तीन दिवसीय मेले का फीता काटकर उद्घाटन करने के बाद पूर्व मंत्री राकेश वर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने मानव जाति को कौमी एकता का संदेश दिया है।