अयोध्या मसले पर पुनर्विचार याचिका की जरूरत नहीं: बुखारी
November 19, 2019 • बाराबंकी टाइम्स

नेमिष हेमंत ' नई दिल्ली 

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने श्रीराम जन्मभूमि मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत अन्य जमातों के फैसले की मुखालफत की है। उन्होंने कहा कि देश के 95 फीसद से अधिक मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहते हैं। मात्र चंद लोग हैं जो मंदिर-मस्जिद का विवाद बनाए रखना चाहते हैं।

इस मुद्दे पर चल रही चर्चाओं के बीच बुखारी ने कहा कि मुख्य तौर पर चार ¨बदुओं पर आपत्तियां थीं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मानते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मुल्क के हालात के मद्देनजर सही फैसला सुनाया है। इसे दोनों धर्म के लोगों ने स्वीकार किया है। उन्होंने चेताया कि पुनर्विचार के फैसले से एक बार फिर समाज में तनाव दिखने लगा है। माहौल में फिर गर्मी आई है। यह खामोश लोगों को उकसाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए जिम्मेदार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वे जमाते हैं।

माहौल खराब करने की हो रही कोशिश : शाही इमाम ने कहा कि मस्जिद का मुकदमा लड़ने के नाम पर देश-विदेश से 7.5 करोड़ रुपये चंदे वसूले गए थे। अब फिर आगे यही होगा। उन्होंने कहा कि यही जमातें फैसला आने से पहले कहती थीं कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वे उसे मानेंगी। अब जबकि फैसले को हंिदूू-मुस्लिम सभी ने स्वीकार कर लिया है। देश में कहीं से भी तनाव या विवाद की खबरें नहीं आई हैं तो ये लोग एक बार फिर देश का माहौल खराब करने में लगे हैं।

शाही इमाम ने कहा कि 134 साल के बाद यह घड़ी आई जब यह सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया। फैसला आने से पहले लोगों में डर था कि देश की फिजा खराब हो जाएगी। इसलिए कुछ तो अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां रहने चले गए। कुछ लोगों ने यात्रएं रद कर दीं। आखिरकार फैसला आया जिसको सभी ने स्वीकार करते हुए राहत की सांस ली। न हंिदूू समाज में जोश दिखा, न ही मुस्लिम समाज ने प्रतिक्रिया दी।

'>>कहा, 95 फीसद से अधिक मुसलमान सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहते हैं

 

'>>मंदिर-मस्जिद का विवाद बनाए रखना चाहते हैं चंद लोग पुनर्विचार के फैसले से समाज में दिखने लगा तनाव

पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय पर भी गौर करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड

राब्यू, लखनऊ : अयोध्या मसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय पर सुन्नी वक्फ बोर्ड विचार करेगा। हालांकि बोर्ड केवल अयोध्या में पांच एकड़ जमीन न लेने के फैसले को ही अपनी 26 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में रखेगा। पुनर्विचार याचिका के मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड अपने पुराने रुख पर कायम है। पर्सनल लॉ बोर्ड के पुनर्विचार के फैसले को सुन्नी वक्फ बोर्ड अपने बोर्ड बैठक में नहीं रखेगा। ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मानने से इन्कार कर दिया है। इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर पांच एकड़ भूमि न लेने का फैसला किया गया है। इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें सुन्नी वक्फ बोर्ड की 26 नवंबर को होने वाली बैठक में लग गईं हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड इसकी तैयारियों में जुट गया है।

'अमन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास'

बरेली : तंजीम उलमा-ए- इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है कि अयोध्या मामले में अब राजनीति हो रही है। पर्सनल लॉ बोर्ड मामले को जिंदा रखना चाहता है। जिससे राजनीतिक बिसात सजा कर हिंदू-मुसलमान के बीच भाईचारा और देश के अमन को नुकसान पहुंचा सकें। मौलाना ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड देश के महज 25 फीसद मुसलमानों की नुमाइंदगी करता है। 75 फीसद मुसलमान इसके खिलाफ हैं। बेहतर होगा कि अयोध्या मामला अब यहीं छोड़ दिया जाए और उससे आगे की बात हो।