सुप्रीम कोर्ट ने रद किया हाईकोर्ट का आदेश, 50 हजार शिक्षकों को राहत
July 17, 2019 • बाराबंकी टाइम्स

बीटीसी और बीएड के नतीजे से पहले टीईटी पास करने वालों के प्रमाणपत्र मान्य

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 50 हजार सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि टीईटी परीक्षा पास करने के बाद बीएड या बीटीसी की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थी भी सहायक शिक्षक बनने के पात्र हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 मई 2018 के फैसले में टीईटी रिजल्ट के बाद बीएड या बीटीसी की डिग्री पाने वालों को नौकरी के लिए अयोग्य करार दिया गया था। हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चयनित शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के लिए 4 अक्टूबर 2011 और 15 मई 2013 को जारी शासनादेश में इस बात का जिक्र नहीं था कि जिनके प्रशिक्षण (बीएड या बीटीसी) का परिणाम टीईटी के बाद आएगा उन्हें टीईटी का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बीएड या बीटीसी में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी भी टीईटी परीक्षा शामिल हो सकते हैं। अगर वह टीईटी परीक्षा में सफल रहते हैं तो उनके सर्टिफिकेट भी वैध होंगे। लेकिन उन्हें नौकरी तभी मिलेगी, जब वो बीएड या बीटीसी की परीक्षा पास कर लेंगे। भर्ती के समय अभ्यर्थी के पास स्नातक, बीएड या बीटीसी और टीईटी की डिग्री होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियुक्ति हर राज्य के नियम के हिसाब से होती है। नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) के 23 अगस्त, 2010 को जारी दिशानिर्देशों में कहा गया था कि टीईटी परीक्षा में बीएड और बीटीसी में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी भी शामिल होने के पात्र हैं। वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमणी, राकेश खन्ना ने पीड़ित सहायक शिक्षकों की तरफ से अदालत में दलील रखी। जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से वकील राकेश मिश्र अदालत में मौजूद रहे।

 

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

 

30 मई को हाईकोर्ट ने कहा था, अगर अभ्यर्थी के प्रशिक्षण (बीएड या बीटीसी परीक्षा) के नतीजे से पहले ही यूपी टीईटी का रिजल्ट आता है तो टीईटी का प्रमाणपत्र वैध नहीं माना जाएगा। इसके बाद अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे।

 

 

से लेकर 2018 तक की भर्तियां आ रही थीं निशाने पर

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

 

शीर्ष न्यायालय ने अभ्यर्थियों के इस दावे को माना है कि चार अक्टूबर 2011 और 15 मई 2013 को जारी शासनादेश में अभ्यथियों के प्रशिक्षण के परिणाम और टीईटी नतीजे में कोई संबंध है। इस स्थिति में टीईटी प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है।

हाईकोर्ट ने चयन निरस्त करने का दिया था आदेश

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 मई के अपने आदेश में बेसिक शिक्षा अधिकारियों से कहा था कि जिन शिक्षकों के प्रशिक्षण का परिणाम उनके टीईटी रिजल्ट के बाद आया है उनका चयन निरस्त कर दें। इस मसले पर अब तक सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

पोस्टमैन भर्ती परीक्षा रद, अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी होगी

 

जाब्यू, नई दिल्ली : डाक विभाग की बीते रविवार को पोस्टमैन की हुई भर्ती परीक्षा रद कर दी गई। आगे अब यह परीक्षा तमिल समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं में कराई जाएगी। राज्यसभा में डीएमके व एआईडीएमके समेत कई राजनीतिक दलों के सदस्यों के हंगामे के बाद यह फैसला लिया गया। हंगामा कर रहे सांसद केवल अंग्रेजी और हंिदूी में परीक्षा कराए जाने का विरोध कर रहे थे। सरकार के स्पष्टीकरण और परीक्षा रद करने के एलान के बाद सदन सुचारु रूप से चला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही तमिलनाडु के सभी दलों ने पोस्टमैन भर्ती परीक्षा में केवल हंिदूी और अंग्रेजी में कराए जाने पर हंगामा शुरू कर दिया। कुछ मिनटों में ही सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विरोधी सांसद इसके समाधान के लिए सरकार से जवाब मांग रहे थे। केंद्रीय दूर संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद दोपहर बाद सदन में आए। उन्होंने सदन में बताया कि यह परीक्षा रद कर दी जाएगी और अब सारी परीक्षाएं सभी क्षेत्रीय भाषाओं में कराई जाएंगी।